हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, हुज्जतुल-इस्लाम सैयद मोहम्मद मोहसिन दोई ने आधुनिक युद्धों की बदलती प्रकृति पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि आज के युग में पारंपरिक युद्धों का स्थान नरम, संज्ञानात्मक और संयुक्त युद्धों ने ले लिया है, जहाँ मीडिया और डिजिटल मंच जनमत को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। उनके अनुसार, हर मीडिया इकाई नरम युद्ध का एक हथियार है, जो या तो हक़ की सेवा कर सकती है या बातिल की।
इस संघर्ष में इस्लामी मीडिया की पहचान ‘सत्य-आधारित और हक़-केंद्रित’ बताते हुए उन्होंने कहा कि यह मीडिया झूठ, धोखे और अनैतिकता का सहारा नहीं ले सकता। उन्होंने इस मामले में धार्मिक छात्रों और हौज़ा संस्थाओं को तीन मुख्य जिम्मेदारियाँ सौंपी हैं:
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प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग): आधुनिक दर्शकों की ज़रूरतों के अनुसार धार्मिक सामग्री को विकसित करना।
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प्रारूपण (फॉर्मेटिंग): पारंपरिक मिंबर और किताबों से हटकर नए मीडिया प्रारूपों में सामग्री तैयार करना।
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वितरण (डिस्ट्रीब्यूशन): मीडिया युद्ध के मैदान में इस सामग्री को प्रभावी ढंग से फैलाना और सत्य के ग्रहणशील दर्शकों तक पहुँचाना।
उन्होंने ‘शहीद नेता’ आयतुल्लाह ख़ामेनई के ‘अग्रणी हौज़ा’ वाले संदेश का हवाला देते हुए कहा कि तालिबान को इस मीडिया जंग के लिए खुद को तैयार करना होगा। अंत में, उन्होंने खुरासान के तालिबान द्वारा संचालित ‘मीडिया युद्ध कक्ष’ की सराहना करते हुए आग्रह किया कि विशेषज्ञों और प्रतिभाशाली लोगों की राय को नज़रअंदाज़ न करके उसे व्यवहार में लागू किया जाए।
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